बिलगरामी की क़लम से
This blog is written and updated by renowned Hindi and Urdu Poet.
Tuesday, 19 June 2018
हमारे पांव डरते हैं तुम्हारे साथ चलने में
Monday, 18 June 2018
ऐसा गीत लिखो मन मेरे
मैंने डिलीट कर दिए
बेच दी क्यों ज़िन्दगी
गुलों में रंग जो न थे
बेहिसाब सोते थे
फिर न मिल जाएं कहीं राह में छलने वाले
Wednesday, 6 June 2018
जुस्तजू नहीं रही
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आंखों से अश्क
आंखों से अश्क
ऐसा गीत लिखो मन मेरे
गुलों में रंग जो न थे